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Sunday, September 20, 2009

नई पीढ़ी तक पहुँचायें साहित्य और संस्कृति : श्री रोहाणी

मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष श्री ईश्वरदास रोहाणी ने कहा है कि नई पीढी को समृद्ध सिंधी साहित्य और संस्कृति से अवगत कराना वरिष्ठ लेखकों का दायित्व है। श्री रोहाणी आज भेड़ाघाट में दो दिवसीय अ.भा. सिंधी साहित्यक संगोष्ठी का शुभारंभ कर रहे थे।
श्री रोहाणी ने कहा कि सिंधी भाषियों के स्वतंत्रता प्राप्ति में योगदान से लेकर, सिंधी पर्वों त्यौहारों और साहित्य से युवा वर्ग को परिचित कराना एक चुनौती पूर्ण कार्य है। यह कार्य सिंधी साहित्यक सांस्कृतिक संस्थानों को मिलकर करना है।
उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा और साहित्य के संरक्षण के लिये सरकारों का सहयोग भी जरूरी है, लेकिन मुख्य रूप से सिन्धी भाषा भाषियों को यह दायित्व वहन करना है। श्री रोहाणी ने कहा कि समाज से समर्थ तबके को साहित्य संरक्षण के लिये प्रेरित किया जाना चाहिए। श्री रोहाणी ने संगोष्ठी में पधारे लेखकों, कलाकारों का जबलपुर वासियों की ओर से स्वागत किया।
राष्ट्रीय सिन्धी भाषा विकास परिषद के उपाध्यक्ष श्री श्रीकांत भाटिया ने कहा कि परिषद द्वारा सिंधी टी.वी. चैनल प्रारंभ करने की दिशा में प्रयास किये जायेंगे। श्री भाटिया ने परिषद के उद्देश्यों की जानकारी भी दी।
प्रारंभ में सिंधी साहित्य के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री सुंदर अगनानी ने स्वागत भाषण मं संस्था की गतिविधियों का विवरण दिया। उन्होंने श्री रोहाणी को सिंधी भाषा के प्रति उनके प्रेम के लिए बधाई दी। सभा के महासचिव एवं सुरभि पत्रिका के संपादक श्री लक्ष्मण भम्माणी ने कहा कि भारत के साथ ही सिंध के प्रख्यात लेखकों को पुरस्कृत एवं सम्मानित करने का कार्य यह संस्था कर रही है।
राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद, नई दिल्ली के उपाध्यक्ष श्री कांत भाटिया और निर्देशक डॉ. एम.के. मतलानी, इंडियन इंस्टीट्यूट आफ सिंधालॉजी, आडीपुर (गुजरात) के निदेशक ख्यात साहित्यकार श्री लखमी खिलाणी मंच पर उपस्थित थे। विधानसभा अध्यक्ष श्री रोहाणी इस अवसर पर साहित्य सभा द्वारा प्रकाशित लेखक-कलाकार-दूरभाष निर्देशिका का विमोचन किया।
संगोष्ठी के प्रथम सत्र में श्री घनश्याम सागर के व्यंग संग्रह खट्टा मिट्ठा कारवां तथा श्री मोहान थानवी के उपन्यास का विमोचन भी किया गया।

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Monday, September 14, 2009

लाड़ली लक्ष्मी योजना में इस साल 276 करोड़ रूपये का बजट - मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश में नये युग का सूत्रपात करें, बेटा हो या बेटी वह प्रदेश के विकास में योगदान करें। प्रदेश में पैदा होने वाली हर बेटी लखपति होगी। इस वर्ष लाड़ली लक्ष्मी योजना में 276 करोड़ रूपये का आवंटन रखा गया है, जरूरत पड़ने पर इसे और भी बढ़ाया जायेगा। वे आज इंदौर में लाड़ली लक्ष्मी योजना के तहत आयोजित बचत पत्र वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम में 501 बालिकाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना के बचत पत्र दिये गये।
श्री चौहान ने कहा कि बेटियों को बोझ नहीं वरदान बनाने के लिये लाड़ली लक्ष्मी योजना शुरू की गयी है। प्रदेश में बेटी के जन्म पर पांच साल में 30 हजार रूपये के बचत पत्र दिये जायेंगे तथा उसके 21 वर्ष की होने पर उसे एक लाख 18 हजार रूपये मिलेंगे। उन्होंने बताया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बालिकाओं को पुस्तकें, गणवेश और दूसरे गांव के स्कूल में जाने के लिये साइकिल मिलेगी।
मुख्यमंत्री कन्यादान योजना में गरीब की बेटी के विवाह की व्यवस्था की गयी है। उन्होंने कहा कि बेटियों को वरदान बनाने में किसी भी जाति, धर्म या वर्ग का भेदभाव नहीं रहेगा। शिक्षकों की भर्ती में पचास प्रतिशत तथा पुलिस की भर्ती में दस प्रतिशत स्थान महिलाओं के लिये आरक्षित रहेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री श्री चौहान ने प्रतीक स्वरूप कुछ बालिकाओं को लाड़ली लक्ष्मी योजना के बचत पत्र दिये।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती रंजना बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि मध्यप्रदेश में 3 लाख से अधिक लाड़ली लक्ष्मी बेटियां हो गयी है, उसमें से 40 हजार इंदौर संभाग की तथा 13 हजार 500 इंदौर जिले की हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में बच्चों को स्वस्थ बनाने के लिये सभी 90 हजार आंगनवाडियों में अभियान शुरू किया गया है। महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बने इसके लिये राज्य सरकार प्रयासरत है।
आरंभ में विधायक श्री सुर्दशन गुप्ता ने कहा कि प्रदेश की इस अनूठी योजना को केन्द्र तथा अन्य राज्य सरकारों ने भी अपनाया है। कार्यक्रम में सांसद श्रीमती सुमित्रा महाजन महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा, इंदौर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री मधु वर्मा, नगर निगम सभापति श्री शंकर ललवानी, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष श्री सत्यनारायण सत्तन, विधायक श्री महेन्द्र हार्डिया आदि भी मौजूद थे।

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Wednesday, September 9, 2009

केन्द्रीय अध्ययन दल ने सूखा की स्थिति की समीक्षा की

Justify Fullकेन्द्रीय अध्ययन दल ने आज मुरैना जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर अल्पवर्षा के कारण उत्पन्न सूखा की स्थिति का आंकलन किया। दल के सदस्यों ने ग्रामीणों से रू ब रू चर्चा कर खरीफ फसल की स्थिति, आगामी रवी फसल की तैयारियों तथा पेयजल और पशु चारा की स्थिति के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की। भ्रमण के दौरान (संभागायुक्त श्री एस.डी. अग्रवाल), केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्य उप सलाहकार कृषि योजना आयोग डा. ए.के. तिवारी, असिस्टेंट डायरेक्टर डिपार्टमेंट एक्सपेंडीचर श्री मेवाराम, सहायक सलाहकार पी एच ई शहरी विकास मंत्रालय श्री एम.धिनधयालन के साथ कलेक्टर श्री एम.के. अग्रवाल, उप राहत आयुक्त श्री अशोक गुप्ता, जिला पंचायत, राजस्व, कृषि, सहकारिता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, जल संसाधन, पशुपालन आदि विभागों के अधिकारी थे।
केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों को नौगांव के ग्रामीणों ने बताया कि पिछले सात आठ साल से वे सूखे की चपेट में हैं। इस वर्ष सबसे कम वर्षा हुई है। इस कारण जहां फसल प्रभावित हुई है, वहीं पशुओं के लिए पानी और चारे की भी किल्लत है। खेतों की नमी बनी रहने पर ही रवी में सरसों- चना की फसल हो सकती है। केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों को ग्राम सिलगिला में ग्रामीणों ने बताया कि खरीफ की फसल तो पूरी तरह से नष्ट हो गई है। अगले कुछ दिनों में वर्षा होने पर ही रवी की फसल की आशा है। गांव में पीने के पानी के लिए तीन हैण्ड पंप है, जिनमें से दो का पानी खारा होने के कारण पीने योग्य नहीं है।
केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने ग्राम सवदलपुर में कुआं और तालाब का निरीक्षण कर जल संग्रहण की स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों ने बताया कि भूमि का जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण के बाद केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने जिले के अधिकारियों के साथ सूखा की स्थिति की समीक्षा की और इससे निपटने के लिए तैयार की गई रणनीति की जानकारी प्राप्त की।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में पिछले दस वर्षों की तुलना में इस वर्ष सबसे कम वर्षा हुई है। इस वर्ष माह जुलाई अंत तक 108.1 मि.मी. और 15 अगस्त तक 105.4 मि.मी. तथा उसके पश्चात 228 मि.मी. कुल 441.5 मि.मी. वर्षा हुई है। अल्प वर्षा के कारण जिले का भू- जल स्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। कम वर्षा के कारण जिले में सिंचाई तालाबों में भी बहुत कम पानी एकत्रित हो पाया है।
कोतवाल जलाशय में 38 प्रतिशत और पिलुआ में 39 प्रतिशत ही जल भराव हुआ है। जिले में इस वर्ष 92200 हेक्टेयर में खरीफ बोनी का लक्ष्य रखा गया था। लक्ष्य की तुलना में 75700 हैक्टेयर में बोनी की गई । सूखे की स्थिति में वोया गया क्षेत्रफल से 67 हजार हेक्टेयर में ही फसल जीवितता का अनुमान है।
जिले के कुल 12733 हैण्ड पंप में से 12484 चालू है। इसी प्रकार 144 नल जल योजनाओं में से विभिन्न कारणों से 75 बंद है। हैण्ड पंपों के सुधार का कार्य निरंतर जारी है। पेयजल समस्या वाले ग्रामों में 88 नये हैण्ड पंप खनन कराये गये। पेयजल समस्या से निपटने के लिए सूखा राहत की 10 करोड 69 लाख 55 हजार रूपये की कार्य योजना राज्य शासन को प्रेषित की गई है।
कलेक्टर ने बताया कि जिले में 6 लाख से अधिक पशु धन है। जिले में पशुओं के लिए चारे की वर्तमान में कोई समस्या नहीं है। अल्प वर्षा के कारण पशुओं के लिए पेयजल की समस्या ग्रीष्म काल में हो सकती है। पशु उपचार पर अगले तीन माह में तीन लाख रूपये का व्यय होना संभावित है।
जिले में जरूरत मंद लोंगों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी स्कीम के अंतर्गत समयवद्ध कार्यक्रम बनाया गया है। योजना के अंतर्गत 14 करोड़ रूपये की राशि उपलब्ध है। सूखे की स्थिति से निपटने के लिए 64 करोड़ रूपये की कार्य योजना तैयार कर भेजी गई है।

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केन्द्रीय दल ने किया सतना जिले में अल्पवर्षा से प्रभावित क्षेत्रों का भ्रमण

केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने सतना जिले की नागौद तहसील के अल्पवर्षा से प्रभावित ग्रामों का भ्रमण कर ग्रामीण कृषकों से खरीफ सीजन में बोई गई क्षतिग्रस्त फसलों और आर्थिकोपार्जन के लिये की जा रही गतिविधियों की जानकारी ली।
दल के सदस्यों ने ग्राम भाजीखेरा, आमा एवं पनगरा के भ्रमण में खेतों में बोई गई फसलोें की जानकारी तथा भाजीखेरा के तालाब सहित ग्राम पहाडिया के बांध का अवलोकन करते हुये उपलब्ध जल स्तर की जानकारी ली। केन्द्रीय दल में शामिल एस.के. हलधर निदेशक केन्द्रीय वाटर कमीशन, संजय कुमार राकेश निदेशक केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय, ललित चौहान अवर सचिव केन्द्रीय खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा जे.के.देव तकनीकी अधिकारी केन्द्रीय पशुपालन एवं मत्स्यपालन के साथ जिला कलेक्टर सुखबीर सिंह, सी.ई.ओ. जिला पंचायत आशीष कुमार, कृषि, जल संसाधन, उद्यानिकी, मत्स्य, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारी भी थे।
केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने सूखे की स्थिति के आकलन के लिये ग्रामीण क्षेत्रों के कृषको के खेतों में जाकर खरीफ सीजन में बोई गई फसलों की जानकारी ली। ग्राम भाजीखेरा में कृषको से खरीफ सीजन में कौन-कौन सी फसल बोई गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि फसलों की बुवाई के बाद पानी नहीं गिरने से फसल सूखकर क्षतिग्रस्त हो गई।
दल के सदस्यों ने ग्राम स्थित तालाब का निरीक्षण कर तालाब के वर्तमान जलस्तर और पर्याप्त वर्षा होने पर तालाब में कितना फिट पानी रहता है के संबंध में जानकारी ली। इसी प्रकार ग्राम पहाडिया स्थित सिंचाई विभाग के बांध का निरीक्षण में जलस्तर और मत्स्यपालन की जानकारी ली गई। दल की जानकारी में सरपंच एवं ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि जहां पहले मत्स्य कृषकों द्वारा करीब 250 क्विंटल मत्स्य उत्पादन किया जाता था। वहां अब अधिकतम 15 क्विंटल मत्स्य उत्पादन हो रहा है।
केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने ग्रामीण क्षेत्रों के भ्रमण में अल्पवर्षा के चलते खराब हुई खरीफ फसल के कृषकों एवं ग्रामीणजनों से बी.पी.एल. परिवारों को शासकीय उचित मूल्य दूकानों से किस दर से कितना खाद्यान्न प्रतिमाह मिल रहा है के संबंध में जानकारी ली।
केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने ग्रामीणों से चर्चा करते हुये वर्षा नहीं होने से खराब हुई खरीफ फसल की जानकारी लेने के उपरांत परिवार के भरण-पोषण के लिये वे आर्थिक उर्पाजन के लिये कौन-कौन सी गतिविधियां कर रहे हैं, जरूरतमंद लोगों को ग्राम पंचायत स्तर पर राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में मिले रोजगार की जानकारी भी ली।
उन्होंने ग्रामीणों से बच्चों को प्रतिदिन के खाद्यान्न में कौन-कौन से आहार खिलाते हैं के संबंध में जानकारी ली। अध्ययन दल द्वारा सरपंचों से ऐसे छोटे कृषक जिनके पास 2-3 हेक्टेयर भूमि है और जो जाबकार्ड धारी हैं जिनकी खरीफ की फसल अल्पवर्षा के चलते क्षतिग्रस्त हुई हैं उन्हें किस आधार पर राष्ट्रीय रोजगार गारंटी मे कार्य उपलब्ध कराया जाता है के संबंध में जानकारी ली। दल के सदस्यों ने सरपंचों को निर्देश दिये कि जॉबकार्ड धारी व्यक्तियों को ग्राम स्तर पर स्वरोजगार मूलक कार्य जरूरत के अनुरूप मुहैया कराने और ग्राम मे पक्के निर्माण के बदले श्रमिक मूलक कार्य कराने के निर्देश दिये।
केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों ने कृषकों एवं ग्रामीणजनों से शालाओं में वितरित हो रहे मध्यान्ह भोजन योजना की जानकारी ली। उन्होंने ग्रामीणों से ऐसे परिवार जिनके बच्चे शाला जाते हैं उन बच्चाें को प्रतिदिन मिल रहे मध्यान्ह भोजन की जानकारी ली। दल के सदस्यों ने हाईस्कूल भाजीखेरा का निरीक्षण करते हुये शाला में दर्ज कुल बच्चों में से कितने बच्च्चों को प्रतिदिन मध्यान्ह भोजन का लाभ मिल रहा है।
मध्यान्ह भोजन का संचालन कौन कर रहा है। माह जुलाई एवं अगस्त में शालाओं में छात्र-छात्राओं की संख्या में वृध्दि या कमी हुई है। पिछले दो माह में मध्यान्ह भोजन के लिये कितनी मात्रा में खाद्यान्न सामग्री का उपयोग हुआ है। प्रत्येक छात्र को मध्यान्ह भोजन के रूप में कितनी मात्रा में खाद्यान्न दिया जाता है, यह सब जानकारी प्राप्त की।
अध्ययन दल के सदस्यों ने ग्राम पनगरा के भ्रमण में बीते तीन महीनों में पशुओं मे हुई बीमारियों की जानकारी लेते हुये किये गये टीकाकरण तथा चिकित्सकों द्वारा किये गये उपचार की जानकारी ली। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि बीते तीन-चार सालों से अल्पवर्षा होने से ग्राम में पीने के पानी का संकट ग्रीष्मकाल में बढ़ जाता है तब बमुश्किल पशुओं को हैण्डपम्प से पानी पिलाते हैं। क्षेत्र में जल स्तर नीचे जाने से 40 फिट तक भी कुये में पानी उपलब्ध नहीं होता है। दल के सदस्यों ने पनगरा ग्राम पंचायत के ग्रामीणों से गत वर्ष पड़े सूखे की स्थिति में मिले मुआवजे की जानकारी ली।

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केन्द्रीय सूखा राहत दल ने लिया ग्वालियर का जायजा

केन्द्रीय सूखा राहत दल ने आज जिले के ग्रामीण क्षेत्रों का भ्रमण कर सूखे की स्थिति का अध्ययन किया। दल के सदस्यों ने विशेषकर, वर्षा की स्थिति, अवर्षा के कारण फसल में हुआ नुकसान, पेयजल, पशु चारा, रोजगार, स्वास्थ्य आदि की स्थिति का आंकलन किया।
इसके पूर्व सदस्यों ने उच्च विश्रांति भवन मुरार में कलेक्टर श्री आकाश त्रिपाठी से जिले में सूखे की स्थिति व इससे निपटने के कारगर उपायों पर विस्तृत चर्चा की।
केन्द्रीय अध्ययन दल में भारत सरकार के उप सलाहकार डॉ. ए के. तिवारी एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के उप निदेशक श्री दीनदयालन हैं। भ्रमण के दौरान इनके साथ जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री विनोद शर्मा सहित कृषि, पी एच ई., चिकित्सा, महिला बाल विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी आदि विभागों के अधिकारी भी मौजूद थे।
पेयजल की देखी गुणवत्ता
केन्द्रीय सूखा राहत दल ने जिले के भ्रमण के दौरान पेयजल स्त्रोतों के पानी की गुणवत्ता देखी। इसके लिये उन्होंने जलस्त्रोतों के पानी को पीकर टेस्ट किया। उन्होंने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिये कि पेयजल के रासायनिक परीक्षण के पश्चात की लोगों को जल का प्रदाय किया जाये। साथ ही शौचालय आदि जल स्त्रोत से 10 मीटर के दायरे में नहीं बनवाया जाये। इसका विशेष ध्यान रखा जाये।
केन्द्रीय सूखा राहत दल ने आज मुरार विकास खण्ड के ग्राम महाराजपुरा, गिरगांव, लक्ष्मणगढ, बरेठा तथा कछपुरा का भ्रमण किया तथा किसानों से सूखे की स्थिति, फसल की स्थिति, कुओं का जल स्तर, स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था, निस्तारी जल, पशु चारा, स्वास्थ्य, रोजगार, आंगनवाड़ी तथा स्कूलों में मध्यान्ह भोजन के संबंध में चर्चा की व स्वयं भी पूरी स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने ग्राम लक्ष्मणगढ़ में बाजरा एवं तिल्ली की फसल देखी। बाजरा में लगभग 50 से 70 प्रतिशत तक एवं तिल्ली की फसल में इससे अधिक नुकसान होना पाया गया। उन्होंने गांव के सरपंच से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना के तहत चल रहे कार्यो व कार्यरत मजदूरों के संबंध में चर्चा की।
सरपंच ने बताया कि गांव के लोग योजना के तहत चल रहे कार्यों पर काम नहीं करना चाहते हैं। अधिकांश ग्रामीण मालनपुंर एवं ग्वालियर मजदूरी के लिये जाते हैं। इस संबंध में दल के सदस्यों ने जिला पंचायत के मुंख्य कार्यपालन अधिकारी को सुझाव दिया कि ऐसी पंचायतें जहां मजदूर नहीं मिलते हैं और योजना की राशि का पूरी तरह उपयोग नहीं हो पाता है।
उन पंचायतों की राशि वापस लेकर अन्य जरूरतमंद पंचायतों को स्थानांतरित कर दी जाये। उन्होंने कहा कि योजनान्तर्गत तालाब निर्माण व गहरीकरण के कार्य कराये जायें, ताकि ग्रामीणों को रोजगार मिलने के साथ ही जल संरचना का निर्माण हो सके।
केन्द्रीय दल नें भ्रमण के दौरान कुओं का अवलोकन किया, जिनमें जल स्तर काफी कम था। साथ ही हैण्डपंप आदि को भी देखा। ग्राम कछपुरा में स्कूल का हैण्डपंप बंद पाये जाने पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री को निर्देश दिये कि बंद हैण्डपंप को तत्काल दुरूस्त कराया जाये।
इसी प्रकार ग्राम बरेठा में आंगनवाड़ी का अवलोकन किया तथा बच्चों की वजन वृद्धि की प्रगति देखी। जिला कार्यक्रम अधिकारी ने आंगनबाड़ी में बच्चों को दिये जाने वाले पोषण आहार की जानकारी दी। इसी गांव के प्राथमिक विद्यालय में सदस्यों ने बच्चों को मिलने वाले मध्यान्ह भोजन की जानकारी ली।
साथ ही मुख्य चिकित्सा अधिकारी से डिपो होल्डर एवं जल शुद्धीकरण के लिये किये गये उपायों के बारे में पूछताछ की।

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केन्द्रीय अध्ययन दल टीकमगढ़ में

भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण के लिए कृषि विभाग के संयुक्त सचिव श्री पंकज कुमार की अध्यक्षता में केन्द्रीय अध्ययन दल ने आज टीकमगढ़ जिले का भ्रमण कर सूखे की स्थिति का जायजा लिया।
ग्राम मड़िया के किसानों ने कहा जमीन में नमी नहीं है। खरीफ की फसल बर्बाद हो चुकी है। रबी की फसल की तो हमने आस ही छोड़ दी है। इस दल में भारत सरकार के पेयजल आपूर्ति विभाग के अतिरिक्त सलाहकार श्री आर.एम. देशपांडे तथा वाटर रिचार्ज सेंटर मुंबई के संयुक्त निदेशक श्री एस.एम. कोठातकर शामिल हैं।
केन्द्रीय अध्ययन दल ने जिले के ग्राम निवाड़ी तथा टेहरका में तालाबों का अवलोकन किया। दोनों ही तालाबों में केवल निस्तार भर का पानी उपलब्ध है। दल ने ग्राम हर्षमउ में खेतों को देखा और किसानों से चर्चा की। इसके पश्चात दल ने ग्राम कुलुआ में आंगनवाड़ी केन्द्र का निरीक्षण किया और ग्रामीणों से चर्चा कर विभिन्न योजनाओं की समीक्षा की।
ग्रामीणों ने दल के सदस्यों को जॉब कार्ड, राशन कार्ड का वितरण, खाद्यान्न का वितरण, कपिलधारा योजना के मजदूरों को भुगतान की जानकारी भी दी। इस पर कलेक्टर टीकमगढ़ श्री अखिलेश श्रीवास्तव ने दल को बताया कि शिविर लगाकर ग्रामीणों की समस्याओं और शिकायतों का मौके पर ही निराकरण कराया जायेगा।
केन्द्रीय अध्ययन दल ने इसके पश्चात ग्राम मड़िया में किसानों से चर्चा की। दल के सदस्यों ने किसानों से पूछा कि अगली फसल क्या बोयेंगे तो किसानों ने कहा कि पानी की कमी के कारण खरीफ की फसल समाप्त हो चुकी है। किसानों ने कहा कि जमीन में नमी नहीं है इसलिए रबी फसल का प्रश्न ही नहीं उत्पन्न होता है।
एक किसान ने दल को बताया कि पिछले साल उनके कुएं में पानी ऊपर से केवल 10 फिट कम था लेकिन इस वर्ष ऊपर सतह से 25 फिट के नीचे भी पानी नहीं है जिससे कुछ दिनों में पीने के पानी की भी समस्या हो सकती है। दल के सदस्यों ने अंत में जिले के ग्राम बड़ागांव में तालाब का निरीक्षण किया तथा किसानों से चर्चा की और दल सागर के लिये रवाना हो गया।
भ्रमण के दौरान दल के साथ संभागायुक्त सागर श्री एस.के. वेद, कलेक्टर टीकमगढ़ श्री अखिलेश श्रीवास्तव, राज्य सरकार द्वारा इस दल के लिये नियुक्त समन्वयक, उप सचिव राजस्व श्री डी.पी. अहिरवार, सागर संभाग के विकास उपायुक्त श्री अनिल द्विवेदी, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग और जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता, कृषि तथा अन्य संबंधित विभागों के संभागीय तथा जिला अधिकारी भी उपस्थित थे।

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Tuesday, September 8, 2009

केन्द्रीय अध्ययन दल द्वारा सागर संभाग के छतरपुर जिले के ग्रामों का भ्रमण

भारत सरकार द्वारा मध्यप्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों के भ्रमण के लिए कृषि विभाग के संयुक्त सचिव श्री पंकज कुमार की अध्यक्षता में भेजे गए केन्द्रीय दल के तीनो उप दलों में से प्रथम एवं द्वितीय दल के सदस्य आज सागर संभाग के छतरपुर जिले के खजुराहो में वायुयान द्वारा पहुंचे। प्रथम दल के सदस्य पन्ना जिले के लिए रवाना हुए, जहां वे कल 8 सितंबर मंगलवार को स्थल भ्रमण कर वास्तविक स्थिति से रूबरू होंगे।
केन्द्रीय अध्ययन दल का द्वितीय दल भारत सरकार कृषि विभाग के सलाहकार श्री कोल्टकर जो कि इस दल के नोडल अधिकारी है, ने आज छतरपुर जिले के ग्राम खजुआ, अर्टरा, ललपुर आदि क्षेत्रों में जाकर खेतों की स्थितियां और ग्रामों में कुओं एवं हैण्डपंपो में उपलब्ध पानी की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने ग्रामीणों से पेयजल के बारे में, खरीफ फसलों की विगत वर्ष के उत्पादन एवं इस वर्ष की संभावित स्थिति की तुलनात्मक जानकारी भी प्राप्त की।
कृषक महादेव प्रसाद पटेल, रामाधार प्रसाद पटेल आदि ने बताया कि धान की फसल शत प्रतिशत खराब हो चुकी है, जबकि सोयाबीन एवं तिली की 25 प्रतिशत तक उत्पादन होने की संभावना है। केन्द्रीय अध्ययन दल के सदस्यों द्वारा पूछे गये प्रश्नों के उत्तर में उन्होंने बताया कि तिली के पौधे सामान्यत: 5 से 6 फीट तक लम्बे होते हैं और उसके बाद उनमें फूल आता है जबकि इस वर्ष तिली के पौधे दो से ढाई फीट होने के कारण फूल आ चुके है। इसलिए उत्पादन बहुत कम होगा।
किसानों से यह पूछे जाने पर कि वे रबी में कौन सी फसल बोयेंगे तो उन्होंने बताया कि जब अभी पानी की कमी है तो वे रबी की फसल बो ही नहीं पायेगे क्योंकि जल रहेगा ही नहीं।
केन्द्रीय अध्ययन दल के खजुराहो पहुँचने पर सागर संभाग के कमिश्नर श्री एस.के. वेद, छतरपुर जिला कलेक्टर डा. ई. रमेश कुमार, पन्ना कलेक्टर श्री अजीत कुमार तथा कृषि, जल संसाधन, सहकारिता, पीएचई आदि विभागों के संभागीय अधिकारियों ने संभाग की वस्तुस्थिति से अवगत कराया।

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Friday, September 4, 2009

सागर मेडिकल कालेज को जल्दी मान्यता देने का अनुरोध

Justify Full मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने केन्द्र सरकार से सागर में स्थापित मेडिकल कालेज को जल्दी मान्यता देने के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री गुलाम नबी आजाद को भेजे पत्र में कहा है कि राज्य सरकार ने भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा निर्धारित मानदंडों के अनुसार सभी आवश्यक कदम उठाए हैं।
इस वर्ष से ही सागर मेडिकल कॉलेज में प्रथम वर्ष की भर्ती के लिए पूरी तैयारी है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि द्वितीय वर्ष का अध्यापन प्रारंभ होने तक शेष कमिया भी पूरी कर दी जाएंगी।
उल्लेखनीय है कि राज्य शासन ने बुंदेलखंड क्षेत्र के सागर में राज्य में 40 साल बाद सरकारी मेडिकल कालेज स्थापित करने का निर्णय लिया है। भूमि आवंटन तथा अन्य औपचारिकताओं के बाद अगस्त 2007 में इसके भवन के निर्माण का काम शुरू हुआ। इस कालेज के भवन निर्माण पर कुल 145.42 करोड़ रुपए लागत आएगी। कालेज की स्थापना के लिए राज्य शासन ने 33.88 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस भूमि पर कालेज के लिए कुल 11.69 लाख वर्गफीट निर्मित क्षेत्र होगा। भवन के निर्माण का प्रथम चरण गत 31 अगस्त को पूरा हो चुका है।
इस मेडिकल कालेज की मान्यता के लिए राज्य शासन लगातार प्रयासरत है। चिकित्सा शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा भी केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री गुलाम नबी आजाद से इस संबंध में मिलकर अनुरोध कर चुके हैं। सागर में कालेज के स्थल का निरीक्षण भारतीय चिकित्सा परिषद द्वारा गत जून तथा जुलाई में किया जा चुका है। कालेज में अध्यापन कार्य के लिए 18 अध्यापकों की भी नियुक्ति की जा चुकी है। निचले स्तर पर भी 77 प्रतिशत कर्मियों की भर्ती की जा चुकी है। कालेज के लिए प्रयोगशाला तथा संबद्ध 342 बिस्तर के अस्पताल आदि की भी व्यवस्था की जा चुकी है।
सरकारी मेडिकल कालेजों में शिक्षकों की भर्ती में आरक्षित पद के पात्र उम्मीदवार नहीं मिल पाने के कारण कुछ पद नहीं भरे जा सके हैं। वर्तमान में वरिष्ठ स्टाफ में 18 प्रतिशत और सीनियर एवं जूनियर रेसीडेंट में भी केवल 23 प्रतिशत की कमी रह गई है। इस कमी को दूर करने के लिए चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। निजी मेडिकल कालेजों में इस प्रकार के आरक्षण का प्रावधान नहीं है।

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Tuesday, April 21, 2009

नई लोकसभा सीट पर पहली जीत दर्ज कराने के लिए आतुर है राजनैतिक दल

प्रदेश की टीकमगढ़ लोकसभा सीट पर मुकाबला रोचक होता जा रहा है क्योंकि सभी दल चाहते हैं कि इस नवगठित सीट पर पहली जीत उनके खाते में जाए।
टीकमगढ़ लोकसभा सीट के लिए 17 उम्मीदवार मैदान में हैं पर मुख्य मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच ही नजर आ रहा है। यह सीट अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित है।
लोकसभा चुनावों को लेकर टीकमगढ़ का अपना कोई इतिहास नहीं है। इसी वजह से राजनीतिक पर्यवेक्षक इस सीट पर हार जीत की अटकलें मौजूदा राजनीतिक समीकरणों की बजाय आठ विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव नतीजों के अब तक के आंकड़ों के आधार पर लगा रहे हैं।
टीकमगढ़ सीट में बुंदेलखंड अंचल का जो हिस्सा शामिल किया गया है वह अब तक आर्थिक और सामाजिक पिछडे़पन, सामंतवादी तानेबाने और दलितों पर होने वाले अत्याचार के लिए ज्यादा चर्चा में रहा है। यहां की चुनावी राजनीति में जाति, धन और बाहुबल की भूमिका को भी अहम माना जाता रहा है। यह बात भी कम रोचक नहीं है कि पिछड़े और उपेक्षित होने के बावजूद बुंदेलखंड अंचल की जनता ने चुनाव लड़ने और वोट डालने में हमेशा बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है।
वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों के लिए 183 प्रत्याशी मैदान में थे और औसतन 65 फीसदी मतदान हुआ था। वर्ष 1977 के चुनावों से लेकर 2008 के विधानसभा चुनावों तक इस क्षेत्र में मतदान का प्रतिशत कभी 50 फीसदी से नीचे नहीं गया। टीकमगढ़ दलित बहुल क्षेत्र माना जाता है। यहां अहिरवार समाज के लोगों की आबादी लाखों में बताई जाती है। संभवत: इसी गणित को ख्याल में रखकर कांग्रेस ने वृंदावन अहिरवार को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं, सागर से चार बार सांसद रहे वीरेन्द्र खटीक भाजपा प्रत्याशी हैं।
टीकमगढ़ में प्रचार प्रसार के लिहाज से फिलहाल किसी भी पार्टी की स्थिति मजबूत नजर नहीं आ रही है। भाजपा प्रत्याशी को जहां कार्यकर्ताओं की कमी खल रही है, वहीं कांग्रेस प्रत्याशी को पार्टी के कद्दावर नेताओं का सहयोग नहीं मिलने से परेशानी महसूस हो रही है।
बहुजन समाज पार्टी अंदरूनी परेशानियों से जूझती प्रतीत हो रही है। टिकट वितरण में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर धन की मांग करने का आरोप लगाने वाले पूर्व उम्मीदवार गयादीन अहिरवार को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है।
अब बसपा ने जी.डी. अहिरवार को अपना प्रत्याशी बनाया है लेकिन गयादीन निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में डटे हुए हैं। इससे नए बसपा प्रत्याशी को पार्टी के अंदर पड़ी फूट से जूझना पड़ रहा है।
समाजवादी पार्टी ने चिंतामन कोरी को अपना प्रत्याशी बनाया है। हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों में पार्टी के निवाडी सीट जीतने की वजह से सपा कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह नजर आ रहा है।
उधर, भाजश इस बार चुनावी परिदृश्य से गायब है। लिहाजा उसके वोट बैंक के बंटने से भाजपा के अलावा थोड़ा बहुत फायदा सभी पार्टियों को मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। टीकमगढ़ सीट पर कुल 17 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। नवगठित टीकमगढ़ सीट पर चूंकि लोकसभा चुनाव पहली बार हो रहा है इसलिए चुनावी मैदान में डटीं पार्टियां इस संसदीय क्षेत्र में आने वाली विधानसभा सीटों के पिछले चुनावी नतीजों और खास तौर पर हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव के परिणामों के आधार पर ही हार जीत की संभावनाएं खंगालने में लगी हैं।
सियासी गुणाभाग का यह पैमाना भी काफी पेचीदा नजर आ रहा है। टीकमगढ़ क्षेत्र में पिछले विधानसभा चुनावों के नतीजे इतने चौंकाने वाले थे कि सियासी धुरंधरों के कयास गलत साबित हो गए।
मिसाल के तौर पर भाजश की राष्ट्रीय अध्यक्ष साध्वी उमा भारती अपने गृह जिले टीकमगढ़ में ही हार गईं।
पिछले विधानसभा चुनाव में टीकमगढ़ संसदीय क्षेत्र की आठ विधानसभा सीटों में से कांग्रेस को केवल दो सीटों टीकमगढ़ और पृथ्वीपुर पर जीत मिली थी, जबकि वह बिजावर में दूसरे, छतरपुर में तीसरे, खरगापुर में चौथे, महाराजपुर और जतारा में पांचवें स्थान पर रही। निवाडी सीट पर तो उसे छठे स्थान से ही संतोष करना पड़ा।
भाजपा को जतारा, छतरपुर और बिजावर विधानसभा सीट पर जीत मिली थी, जबकि पृथ्वीपुर, निवाडी और महाराजपुर सीट पर वह दूसरे स्थान पर रही। खरगापुर और टीकमगढ़ सीट पर वह क्रमश: तीसरे व चौथे स्थान पर रही।
सपा केवल एक सीट निवाडी पर ही जीत दर्ज कर सकी। बाकी सीटों पर वह दूसरे से लेकर दसवें स्थान पर रही। बसपा इन आठ विधानसभा सीटों में से कहीं भी अपना खाता भी नहीं खोल सकी लेकिन वह छह सीटों पर तीसरे और दो सीटों पर दूसरे स्थान पर रही।

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Saturday, April 18, 2009

सागर लोकसभा सीट बनी हारे योद्धाओं की जंग का मैदान...

पंद्रहवीं लोकसभा के लिए हो रहे चुनावों की सबसे खास बात यह मानी जा रही हैं कि इस बार परिसीमन की कांट-छांट व दलबदल की होड़ ने पूरे देश के चुनावी समीकरणें को मथ कर रख दिया है। मप्र का बुंदेलखण्ड क्षेत्र भी इन प्रभावों से अछुता नहीं रहा है।
बुंदेलखण्ड क्षेत्र में सागर सीट पर तो परिसीमन व दलबदल के दौर के चलते जातिगत व राजनैतिक समीकरणों मे आ रहे बदलावों से निपटने के लिए कमोबेश सभी दल एक समान रणनीति पर काम करती नजर आ रहे हैं। इस बार राजनैतिक दलों -खासकर भाजपा व कांग्रेस -ने ऐसे उम्मीदवारों पर दांव खेला है जो लंबे समय से वोटरों को लुभाने मे फिसड्डी व नेताओं को लुभाने में अव्वल साबित होते आ आए हैं।
मप्र मे लगातार दूसरी बार सत्तारूढ हुई भाजपा सबसे पहले इस रणनीति पर अमल करती नजर आई। पार्टी ने सागर लोकसभा सीट पर ऐसी नेता को अपना प्रत्याशी घोषित किया हो जो पिछले दो विधानसभा चुनाव लगातार हार चुकें हैं। इसी राह पर चलते हुए कांग्रेस पार्टी ने भी पूर्व में दो बार १९८९ व १९९६ में बैतूल से लोकसभा चुनाव हार चुके हाकी के पूर्व ओलिम्पिक खिलाडी असलम शेरखान को सागर लोकसभा सीट का प्रत्याशी घोषित किया है।
लेकिन चुनावी जंग मे एक से ज्यादा बार पटखनी खा चुके प्रत्याशियों की कूटनीतिक यात्रा टिकिट हासिल करने के बाद भी थमीं नहीं है। अपनी पार्टी के नेताओं को रिझाकर टिकिट हासिल करने के बाद ये सियासत के खिलाड़ी अब अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए प्रतिद्वंदी पार्टियों के कद दावर नेताओं को लुभाने मे लग गए है।
इस खेल मे भी भाजपा प्रत्याशी सबसे आगे भाग रहे हैं। बुंदेलखण्ड के सागर संसदीय क्षेत्र मे भाजपा की सेंधमारी से सबसे ज्यादा चोट कांग्रेस व बसपा को पडी है। अपनी जीत सुनिश्चित करने की कवायद मे भाजपा ने कांग्रेस व बसपा के असंतुष्ट नेताओं को अपने खेमें मे शामिल करने का एक अभियान सा छेड रखा है। अकेले सागर संसदीय क्षेत्र मे ही कांग्रेस पार्टी के कई कद दावर नेता भाजपा खेमे में जा चुके हैं।
इनमें सागर लोकसभा सीट पर टिकिट के प्रबल दावेदार माने जाने वाले दारु व्यवसायी संतोष साहू के अलावा खुरई क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष जिनेन्द्र गुरहा, विस चुनावों में टिकिट नहीं मिलने से नाराज हुए लक्ष्मी नारायण यादव, हाल ही में भाजपा को गले लगा चुकें है। पहले से ही अंतर्कलह, गुटबाजी व सत्ता विरह से कराह रही कांग्रेस पार्टी भाजपा की इस चोट से तिलमिलाई हुई लग रही है।
भाजपा की इस तोड -फोड की नीति से बसपा भी नहीं बच सकी है। जहां लोकसभा चुनावों की प्रक्रिया शुरू होने के पहले ही खुरई विधानसभा क्षेत्रों से बसपा के टिकिट पर चुनाव लड चुके सौवीर जैन ने भाजपा का दामन थामा वहीं सागर लोकसभा सीट से बसपा के अधिकृत प्रत्याशी घोषित हो चुके शैलेष वर्मा ने नामांकन पत्र भरने के बाद भी बसपा को अलविदा कह कर भाजपा मे शामिल हो गए।
दलबदल के खेल के अलावा परिसीमन की वजह से भी सागर लोकसभा सीट पर भाजपा ही फायदे में नजर आ रही है। अगर हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों के नजरिए से देखें तो परिसीमन पूर्व के सागर जिले में चुनावी जीत का आंकड ा भाजपा व कांग्रेस के बीच ५-३ का था। वही परिसीमन के बाद ६-२ में बदल गया है।
परिसीमन के बाद सागर लोकसभा संसदीय क्षेत्र से बण्डा, रहली व देवरी विधानसभा क्षेत्र दमोह लोकसभा क्षेत्र मे पहुंच गए हैं। इनमें से बण्डा सीट पर कांग्रेस व रहली व देवरी सीट पर भाजपा के खाते मे दर्ज है। जबकि विदिशा जिले के जो तीन विधानसभा क्षेत्र- शमशाबाद, कुरवई व सिरोंज सागर लोकसभा क्षेत्र शामिल हुए हैं भाजपा के ही खाते मे दर्ज हेै। हालांकि विस सीटों के इस अदल-बदल से सागर लोकसभा क्षेत्र में करीब ८३ हजार मतदाता कम हो गए है। जिससे सागर लोकसभा सीट बुंदेलखण्ड की सबसे कम मतदाता वाली सीट बन गई है। इस बात का भी लोकसभा चुनावों के नतीजों पर कुछ असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
लेकिन इस बार के लोकसभा चुनावों मे तीसरी ताकत के रुप में उभर रहे राजनैतिक दलों खासकर बहुजन समाज पार्टी व समाजवाद पार्टी के तेवरी के ढीले पड ने व भाजश के चुनावा परिदृश्य से पूरी तरह से गायब हो जाने से चुनावी मुकाबला भाजपा व कांग्रेस के बीच होता दिख रहा है।
लेकिन कांग्रेस पार्टी के ही सियासती धुरंधरों के मुताबिक पार्टी के शीर्ष नेतृत्व द्वारा टिकिट के स्थानीय दावेदारो को दरकिनार कर असलम शेरखान को सागर लोकसभा सीट का प्रत्याशी घोषित किए जाने से पार्टी के अंदर ही काफी खलबली मची हुई है। भाजपा ही नहीं कांग्रेस के खेमें में भी यह माना जा रहा है कि कांग्रेस ने असलम के बहाने भाजपा को वाक ओव्हर दे दिया है। इस सब के चलते ऐसा माना जा रहा है कि आमने सामने की लड ाई में भी कांग्रेस के योद्भा आधे मन से ही मोर्चा संभाल रहे हैं। लेकिन कांग्रेस के एक खेमे का यह भी मानना है कि पार्टी द्वारा इस क्षेत्र से पहली बार किसी अल्पसंख्यक को टिकिट दिया एक सोची समझी रणनीति का हिस्सा है। जिससे अच्छे नतीजे आने की उम्मीद है।

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Tuesday, April 14, 2009

खजुराहो में सीधा मुकाबला हाथ व कमल के बीच

खजुराहो सीट बुंदेलखण्ड के उन क्षेत्रों मे गिनी जाती हैं जहां देश की आजादी के ६० साल बाद भी सामंतवाद का किला पूरी तरह से ढहा नहीं है। सामंतवाद की छ़त्रछाया मे जातिवाद की बेल खूब फलती-फूलती रही। तीसरी ताकत कहे जाने वाले दलों ने-सपा व बसपा- जातीगत समीकरणों के सहारे ही इस क्षेत्र मे अपने पैर पसारने की शुरूआत की ।
कांग्रेस व भाजपा जैसी बडी पार्टियों को भी जातीगत समीकरणों मे ही तालमेल बैठाने के चक्क्र में इस सीट पर अपने उम्मीदवारों का नाम तय करने मे काफी मशक्कत करनी पडी । खजुराहो संसदीय क्षेत्र ब्राहा्रण व ठाकुर जाति बाहुल्य क्षेत्र माना जाता है। इसी गणित को ख्याल मे रखकर कांग्रेस ने ब्राहा्रण व भाजपा ने ठाकुर प्रत्याशी पर दांव खेला है।
भाजपा ने बिजावर विधानसभा के पूर्व विधायक जितेन्द्र सिंह बुंदेला को व कांग्र्रेस ने हटा के पूर्व विधायक राजा पटैरिया को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। दोनों ही पार्टी के प्रत्याशी राजनीति की जोड -तोड से अच्छी तरह वाकिफ है। सो मुकाबला के दमदार होने के आसार है। इस मुकाबले में कांग्रेस पार्टी को जिताने की जिम्मेदारी जहां क्षेत्र के कद दावर नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी के कंधे पर है वहीं भाजपा की ओर से रामकृष्ण कुसमरिया व शैलेन्द्र बरूआ मोर्चा संभाल रहे है।
हालांकि परिसीमन से खजुराहो के नक्शे में हुए बदलाव की वजह से राजनैतिक दलों को अपनी चुनावी रणनीति मे भी काफी फेरदबल करना पड रहा है। पिछले चुनावों तक यहां का मुकाबला बहुजन समाज पार्टी व समाजवादी पार्टी के बढ ते प्रभाव की वजह से त्रिकोणीय व चतुष्कोणीय होने की दिशा मे खिसकर रहा था। लेकिन मौजूदा हालात में कांग्रेस व भाजपा के बीच आमनेःसामने की टक्कर के हालात बन रहे है।
भाजपा व कांग्रेस द्वारा इस क्षेत्र में सपा व बसपा के किले में की गई लगातार सेंधमारी के चलते जहां कांग्रेस के विक्रम सिंह नातीराजा सपा से कांग्रेस मे आ गए तो वहीं सपा के ही विजय बहादुर सिंह बुंदेला व अशोक वीर विक्रम सिंह भाजपा मे आ गए। पिछले विधानसभा चुनावों मे कांग्रेस से टिकिट नहीं मिलने पर बसपा मे गए शंकर प्रताप सिंह मुन्ना राजा भी हाल ही मे भाजपा मे आ गए हैं। इसी जोड़ तोड के नतीजतन मौजूदा हालातों में खजुराहो संसदीय क्षेत्र के चुनावी संग्राम मे बसपा व सपा की चुनौती बेदम नजर आ रही है।
वर्तमान में खजुराहो संसदीय क्षेत्र मे आठ विधानसभा सीटें हैं। जिनमें छतरपुर जिले की दो- चंदला व राजनगर, पन्ना जिले की तीन पन्ना, गुन्नौर व पवई व कटनी जिले की तीन विजय राधवगढ , मुड वारा व बहोरीबंद विधानसभा सीटों को शामिल किया गया है।
परिसीमन के बाद खजुराहो संसदीय सीट मे शामिल विधानसभा सीटों पर हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजें भी खजुराहो सीट पर कांग्रेस व भाजपा के बीच कांटे का मुकाबला होने के संकेत दे रहे हैं।
छतरपुर जिले की दोनों सीटों चंदला व राजनगर मे हाल ही मे हुए विधानसभा चुनावों में जहां चंदला सीट भाजपा ने जीती वहीं कांग्रेस चौथे स्थान पर रही। जबकि राजनगर सीट पर कांग्रेस पहले स्थान पर रही तो भाजपा को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड ा। इन दोनों ही सीटों पर भाजपा व कांग्रेस को मिले मतों की संख्या मे दोगुने का अंतर रहा। चंदला मे भाजपा को २०।६५ फीसदी वोट मिले तो कांग्रेसे को महज ११.०१ फीसदी ही मत मिले। इसी तरह राजनगर मे कांग्रेस को ३२.४८ तो भाजपा को१६.१६ फीसदी ही मत मिले।
पन्ना जिले की तीन सीटों मे से दो सीट -पवई व गुन्नौर भाजपा के खाते मे गई जबकि पन्ना सीट पर कांग्रेस की जीत हुई। लेकिन पन्ना सीट पर दोनों के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिली । इस सीट पर महज ४२ मतों के अंदर से फैसला हुआ। लेकिन गुन्नौर व पवई सीट पर कांग्रेस को तीसरा व चौथा स्थान मिला। इन सीटों पर उसे क्रमशः १७.८९ व ८.८३ फीसदी ही मत मिले।
जबकि कटनी जिले की तीन सीटों मे से बहोरीबंद, व विजयराधवगढ़ कांग्रेस व मुड वारा सीट भाजपा के खाते में गई। मुड वारा मे भाजपा को ४७.५० फीसदी मत मिले तो कांग्रेस को १९.८२ फीसदी ही मत मिले। वहीं विजय राधवगढ मे कांग्रेस के को ४४.०६ तो भाजपा को २५.१५ फीसदी ही मत मिले।
आंकड ों की भाषा से तो साफ हो रहा है कि खजुराहो संसदीय क्षेत्र मे चार-चार सीटें हासिल करने वाली भाजपा व कांग्रेस के बीच बराबर की टक्कर है। इनता ही नहीं भारतीय जनशक्ति पार्टी द्वारा चुनाव नहीं लड ने की घोषणा व बहुजन समाज पार्टी व समाज वादी पार्टी द्वारा लोकसभा चुनाव के प्रति अबतक अख्तियार ढुलमुल रवैये की वजह से भी मुकाबला के द्भिपक्षीय ही रहने के हालात बन रहे है।
ऐतिहासिक नजरिए से भी इस सीट पर उलटफेर होते रहे हैं। आस्तित्व मे आने के बाद दो साल तक यह सीट कांग्रेस के कब्जे मे रही जबकि १९७७ मे भारतीय लोकदल के लक्ष्मीनारायण नायक यहां चुनाव जीते। इसके बाद १९८० व ८४ मे कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सत्यव्रत चतुर्वेदी की मां विद्यावती चतुर्वेदी इस सीट पर चुनाव जीतीें। लेकिन १९८९ से लेकर २००४ के पिछले चुनाव तक इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। सिर्फ मे बीच मे एक बार १९९९ सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कांग्रेस को यहां विजय दिला पाए। जबकि भाजपा की ओर से १९८९ से १९९८ तक चार बार उमा भारती व २००४ मे रामकृष्ण कुसमरिया ने जीत हासिल की।
पिछले चुनावों तक खजुराहो लोकसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के लिए मिले वोटों का प्रतिशत ३० के आसपास ही खिसकता रहा है। सिर्फ १९८४ व १९९९ के चुनावों मे ही उसे ४० फीसदी से ज्यादा मत मिले। जबकि भाजपा को इस सीट पर वर्ष १९९९ को छोड कर कभी कभी ४० फीसदी से कम मत नहीं मिले।
बहरहाल चुनावी जंग का बिगुल तो बज चुका है सभी पार्टियों के योद्भा भी मैदान मे उतरने लगे हैं। अंतिम नतीजा जो भी रहे पर यह बात स्पष्ट हो चली है कि दोनों ही पार्टी के लड़ाकों को अपने हाशियों की ओर खिसकते राजनैतिक कैरियर मे नई जान फूंकने का मौका मिला है। देखना होगा कि इनमे से कौन अपनी पार्टी की आंतरिक गुटबाजी, असंतुष्टों के प्रपंचों व परिसीमन की वजह से उलझे जातीय समीकरणों के बीच तालमेल बैठाकर विजश्री हासिल कर पाता है।

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Monday, March 30, 2009

अमेरिका व यूरोप से ज्यादा पैसा है भारत का स्विस बैंक में-रघु



अमेरिका
के दबाव मे स्विस बैंक द्वारा पहली बार जारी रिपोर्ट के मुताबिक इस बैंक मे भारत का 65 लाख करोड् रूपय से ज्यादा राशि जमा है। यह देश के केन्द्रीय बजट का तीन गुना है। इस अहम मुद्दे पर भी संसद मे बहस नहीं होना अफसोसजनक है।
यह बात समाजवादी चिंतक व लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रघु ठाकुर ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कही। उन्होने बताया कि स्विस बैंक मे अमेरिका व यूरोप से भी ज्यादा पैसा जमा होना बताता है कि किस तरह लोगों ने अपनी काली कमाई विदेशों मे जमा कर रखी है। अगर अमेरिका अपना पैसा स्विस बैंक से वापस ले सकता है तो भारत क्यों नहीं ले सकता है।
हाल ही मे ईजराईल के
साथ हुए एक रक्षा सौदे मे 600 करोड़ रूपए की कमीशन खोरी के खुलासे के बारे मे श्री ठाकुर का कहना है कि इस सौदे मे दलाली खाई गई है। इजरायली कंपनी की सूचना के बाद सरकार ने समझौते का खुलासे को रोका और खुलासा होने पर समझौता भंग करने की धमकी दी।
लोसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री ठाकुर ने कहा कि वर्ष 1990-91 मे हुए हथियार सौदे के बाद बिचौलिया प्रथा अनौपचारिक रूप मे खत्म हो गई थी। इस सौदे मे हुए भ्रष्टाचार की वजह से प्रधानमंत्री को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

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Saturday, March 28, 2009

भाजश की गैर मौजूदगी से रूक सकता है बुंदेलखण्ड का विकास

इन दिनों बुंदेलखण्ड में इस मुद्दे पर काफी माथा पच्ची चल रही है कि बुंदेलखण्ड के चुनावी व राजनैतिक परिदृश्य से भाजश गायब रहने सेक्षेत्र की दशा और दिशा पर क्या असर पडे़गा?
बदलते राजनैतिक समीकरणों के चलते जहां हाल ही में भाजश के कद्दावर नेता प्रहलाद पटेल भाजपा मे जा चुके हैं। वहीं पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष उमा भारती ने भी आडवाणी के लिए काम करने की इच्छा जताई है। इसके अलावा संसाधनों के अभाव को भी पार्टी के चुनाव मे उतरने में बाधक बताया गया है। इन हालातों को देखकर कर लगता है कि लोकसभा चुनावों मे भाजश वैसी सक्रिय नहीं रहेगी जैसी वह विधानसभा चुनाव २००८ के दौरान रही थी। बुंदेलखण्ड शुरू से ही भाजश की सक्रियता का केन्द्र रहा है। अगर भाजश चुनावाी परिदृश्य से गायब रहेगी तो इसका बुंदेलखण्ड की राजनीति पर असर पडे़ बिना नहीं रहेगा।
हालांकि क्षेत्र की जनता को इस बात का अहसास है कि बुंदेलखण्ड के विकास के लिए जितना काम उमा भारती के सत्ता मे रहने से नहीं हुआ उससे कहीं ज्यादा काम उनको सत्ता से बेदखल किए जाने के बाद हुआ है। पर यह भी सच है कि उमा फेक्टर की महज मौजूदगी भर से लंबे समय तक नजरंदाज किए जाने वाले बुंदेलखण्ड को देश की मुख्य धारा की पार्टियों से तवज्जो मिलना शुरु हुई। जिसके चलते यहां विकास की धारा प्रवाहित होने लगी।
सियासतदारों के मुताबिक किसी भी राजनैतिक पार्टी को उसके जन्म के बाद के पांच-दस सालों को उसका शैशवकाल ही कहा जाता है। इस लिहाज से भाजश ने अपनी शुरूआत से ही बुंदेलखण्ड मे देश की मुख्य धारा की दोनों पार्टियों कांग्रेस व खासतौर पर भारतीय जनता पार्टी की नाक मे दम कर दिया। विधानसभा चुनावों मे खासकर भाजपा ने भाजश को बड़ा खतरा नहीं माना लेकिन उसे यह मानकर नजरंदाज भी नहीं किया कि भाजश बड़ा खतरा नहीं है।
भाजश ने विधानसभा चुनावों के दौरान बुंदेलखण्ड की कुल २६ सीटों मे से २ सीटें- बडा मलहरा व निवाडी- हासिल कर देश के चुनावी लेखे जोखे मे अपना खाता खोला। जबकि परिसीमन के बाद के सागर संभाग की चारों लोकसभा सीटों में से टीकमगढ लोकसभा क्षेत्र की टीकमगढ व जतारा व खजुराहो संसदीय क्षेत्र मे छतरपुर जिले की चंदला, कटनी जिले की बहोरीबंद व पन्ना जिले की पवई विधानसभा सीट पर भाजश के प्रत्याशियों ने कांग्रेस व भाजपा को सीधी टक्कर भी दी।
भारतीय जनशक्ति पार्टी के उदय को बुंदेलखण्ड के राजनैतिक इतिहास मे एक युग नए की शुरुआत के रुप मे भी देखा जाता रहा है। भाजपा के ही मांस-मज्जा से जन्मी पार्टी खासतौर पर भाजपा की मुखालफत की खुराक से ही पुष्ट होती आई । भाजपा के असंतुष्टों और उमा के समर्थकोर्ं से ही भाजश का कुनबा अब तक समृद्भ होता रहा। लेकिन समय के साथ भाजश का अपना अलग जनाधार भी तैयार होता रहा। जिससे बुंदेलखण्ड की राजनीति राजनीतिक परिदृश्य मे देश की दो मुख्य राजनैतिक पार्टियों के एकाधिपत्य के लिए चुनौती देने वाले तीसरी ताकत के उदय के भी आसार बने।
इसके अलाावा बुंदेलखण्ड की सीमाओं के उप्र से लगे होने की वजह से भी राजनैतिक दलों ने बुंदेलखण्ड के विकास को खास महत्व दिया। उन्हें भय था की कही ं बलबती होती भाजश की आड़ मे अन्य पार्टियां भी इस क्षे त्र मे अपने पैर न जमा लें। इस मकसद से बुंदेलखण्ड मे अपनी पकड बरकरार बनाए रखने के लिए इन पार्टियों ने क्षेत्र की वर्षों से लंबित रही मांगों को पूरा कराने मे कोई कसर बाकी नहीं रखी। मुख्य धारा की पार्टियों ने बुंदेलखण्ड मे तीसरी ताकत के पैदा होने की सभी संभावनाओं पर रोक लगाने में अघोषित एकजुटता भी दिखाई। इस राजनैतिक उठापटक के चलते क्षेत्र के विकास को भी गति मिलती रही।
लेकिन मौजूदा राजनैतिक परिदृश्य मे बुंदेलखण्ड मे तीसरी ताकत दम तोड ती नजर आ रही है। इससे मुख्य धारा की पार्टियों कांग्रेस व भाजपा की तो बांछे खिली हुई इस सब के चलते जनता मे यह आशंका भी जोर पकड ने लगी है कि तीसरी ताकत के रूप मे सामने आए राजनैतिक संकट के गायब होने से बेफिक्र हुए राजनैतिक दल कहीं एक बार फिर बुंदेलखण्ड में चल रही विकास की बयार का रूख किसी ओैर दिशा मे न मोड दें?

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Wednesday, March 25, 2009

नाकामियां छुपाने के लिए है भाजपा की न्याय यात्रा-राजा



वर्ष
2003 मे बिजली, पानी और सड़क को मुद्दा बनाकर सतारूढ़ हुई भाजपा पांच साल बाद भी यह समस्यांए हल करने में नाकाम रही है। लोकसभा चुनाव में इन मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने कथित न्याय यात्रा का नाटक कर रही है।
उक्त उद्गार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजा पटैरिया ने पत्रकारों से चर्चा में व्यक्त किए। श्री पटैरिया ने कहा कि केन्द्र की यूपीए सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाकर भाजपा सरकार सौ फीसदी झूठ बोल रही है। भाजपा सरकार केन्द्रीय योजनाओं का लाभ लेकर स्वयं की पीठ थपथपा रही है।
वाजपेयी सरकार की तुलना में मनमोहन सिंह सरकार ने मप्र को ज्यादा कोयला दिया है। कोयला को लेकर यूपीए सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाना विशुद्ध लफ्फाजी है। भाजपा के शासनकाल में मप्र मे बिजली के दो लाख कनेक्शन कम हुए हैं। शिवराज सिंह सरकार आम जनता को पर्याप्त बिजली मुहैया नहीं करा रही है। जबकि अन्य राज्यों को बिजली बेचकर यह सरकार कमीशन खाने का काम कर रही है।
श्री पटैरिया ने कहा कि अमेरिका और चीन जैसे संपन्न देश इन दिनों मंदी के दौर से गुजर रहे हैं। जबकि भारत में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की कुशल नीतियों के कारण ही भारतीयों का पैसा सुरक्षित है।
खजुराहो संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे राजा पटैरिया ने एक सवाल के जवाब मे कहा कि वे खजुराहो क्षेत्र में बाहरी प्रत्याशी नहीं हैं। वे विगत 30 वर्षों से राजनैतिक तौर पर जीवनदायनी कार्यकर्ता के रूप मे काम करते रहे है। एक दशक पहले कटनी को जिला बनाओं आंदोलन से जुड़े रहे। बुंदेलखण्ड मे पांच साल से कांग्रेस के प्रभारी हें। खजुराहो क्षेत्र मं राजनैतिक ही नहीं सामाजिक व धार्मिक कार्यक्रमों मे सक्रिय रहे हैं। उनके बाहरी प्रत्याशी होने का जो विरोध किया जा रहा है वह तात्कालिक आक्रोश हो सकता है। श्री पटैरिया ने कहा कि मतदाताओं ने उन्हें जिताकर सेवा का अवसर दिया तो वे खजुराहो मे अतंर्राष्ट्रीय महोत्सव कराने व पर्यटन मे विशेष दर्जा दिलाने का प्रयास करेंगें।
उन्होनें कहा कि पन्ना मे केन-बेतवा नदी लिंक परियोजना मे क्षेत्र की सात नदियों समाहित हैं मगर इससे उप्र के क्षेत्र को अधिक पानी मिलेगा। अत: वे प्रयास करेंगें कि अपने क्षेत्र को समुचित पानी दिलाने उक्त परियोजना का पुनरीक्षण किया जाए। कटनी जिला खनिज संसाधन में मप्र का सिरमौर है। अत: इंदौर की तरह बुंदेलखण्ड और महाकौशल के बीच कटनी व्यापार केन्द्र बनाने की भी कोशिश करूंगा।
क्षेत्र के आदिवासियों को वन अधिकार कानून के लाभ दिलाने का प्रयास वे पहले से ही कर रहे हैं। आदिवासी को वनोत्पादन का समुचित लाभ दिलाने की वर्तमान में चरमराई हुई व्यवस्था को दुरूस्त करने में जुटुंगा।
श्री पटैरिया ने कहा कि इस क्षेत्र के लोकप्रिय जनप्रतिनिधि सत्यव्रत चतुर्वेदी ने अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, रेल लाईन तथा सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए अहम काम किया है। खजुराहो-पन्ना-कटनी रेल लाईन बने यह भी उनका प्रयास रहेगा।
हीरा उद्योग के लिए प्रसिद्ध पन्ना क्षेत्र मे दोहन व्यवस्थित हो तथा उसका अधिकाधिक लाभ स्थानीय लोगों को मिले यह कोशिश जरूर की जाएगी।

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Tuesday, March 24, 2009

ठौर नहीं मिला सो लौट आए प्रहलाद ?





कहते हैं राजनीति मे कोई स्थायी दोस्त और दुश्मन नहीं होते हैं। प्रहलाद पटेल की भाजपा मे वापसी कुछ ऐसी ही लगती है। जिस जोश व ठसक के साथ उन्होने भाजपा छोड़ी थी वह उनके भाजपा मे वापस आने के समय कहीं नजर नहीं आ रहा है।
उनकी वापसी किसकी जीत कही जा सकती है भाजपा की, शिवराज की , प्रहलाद की या फिर किसी की भी नहीं? इस का जवाब जनता ही दे तो बेहतर होगा।
पर भाजपा को अलविदा कहते और दोबारा उसका दामन पकड़ने के दौरान प्रहलाद ने भाजपा के बारे मे क्या क्या कहा उसको एक बार सिलसिलेवार ढंग से देखना वाकई रोचक होगा। हां आप भी यह देख सकते हैं
। बस फोटो पर क्लिक करें पलक झपकते ही सबकुछ आपके सामने होगा। प्रहलाद पटेल का यात्रा वृतांत-यहां क्लिक करें
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Sunday, March 15, 2009

जिन्दगीं के रंग मौसम के संग बदल रहे हैं घड़ी घड़ी...

मौसम में आए अनपेक्षित बदलाव से किसानों के प्राय: सभी अखबारों मे खबरों के रूप मे दिख रही है। माहौल मे उड़ रहा रंग गुलाल के छींटे रह रह कर छुटपुट खबरों के रूप मे अखबारों मे जगह घेरे हुए हैं।
दैनिक आचरण ने मौसम मे आए बदलाव से किसानों मे बढ़ रही चिंता को सबसे ज्यादा अहमियत देते हुए इस खबर को 'मौसम बदलने से किसान चिंतिति' शीर्षक से अपनी पहली खबर बनाया है। वहीं नवभारत ने सागर लोकसभा सीट पर भाजपा के प्रत्याशी घोषित हुए भूपेन्द्र सिंह ठाकुर के सागर आगमन पर हुए स्वागत को अपनी पहली खबर बनाया है। राजएक्सप्रेस ने सागर विवि के एक प्रो० द्वारा बुंदेलखण्ड क्षेत्र मे उर्जा के वैकल्पिक स्रोत के रूप मे पवन चक्कियों के लगाने की सिफारिश किए जाने के प्रस्ताव को अपनी पहली खबर बनाया है।
जबकि दैनिक जागरण ने राजनैतिक माहौली में लोकसभा चुनावों की वजह से हो रही उथल-पुथल को मद्देनजर रख राजनीति मे आ रही गिरावट को उठाया है। 'लेखा के सिद्धांतों की अमिट तहरीर को भूली भाजपा' शीर्षक से लगाई खबर मे लिखा है कि राजनैतिक क्षेत्र मे राजमाता विजय राजे सिंधिया के रूप मे लोकप्रिय हुई सागर मे जन्मी लेखा दिव्येश्वरी ने 1966 मे कांग्रेस पार्टी मे आई नेतिक गिरावट से हताश होकर भाजपा पार्टी का दामन थामा था। लेकिन वही भाजपा दल भी आज उन्ही आरोपों से घिरा दिख रहा है।
नवदुनिया ने 'भाजपा मे जोश, कांग्रेस मे विरोध, शीर्षक से लगाई खबर मे भूपेन्द्र सिंह को सागर का भाजपा प्रत्याशी घोषित किए जाने पर पार्टी कार्यकर्ताओं के खुशी के इजहार व कांग्रेस पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा असलम शेरखान को सागर का प्रत्याशी बनाए जाने की संभावनाओं के चलते उनके पुतले जलाकर विरोध प्रदर्शन किए जाने को खबर लगाई है।
दैनिक भास्कर ने डॉ० हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय मे आदर्श जवाब तालिका के बिना ही मूल्याकन किए जाने के मुद्दे को अपनी पहली खबर बनाया है। इसके अलावा शहर को उपनगर से जोड़ने वाली सड़क के फोरलेन मे परिवर्तित होने के दौरान सड़क के बीचों बीच खड़े बिजली के खंबों को नहीं हटाए जाने को यातायात के लिए खतरनाक बन जाने के मामले को भी अखबार ने काफी अहमियत से छापा है।
अन्य खास खबरों में दैनिक जागरण ने मापतौल की नई प्रणाली के आगे देश मापतौल की प्रचलित देशी तरीकों के चलन से बाहर होते जाने के विषय को उठाया है। ' पोली, पाई, पसेरी हुई दूर' शीर्षक से लगाई खबर मे लिखा है कि अब द्रव्य मापन के ईकाईंयां अतपई, छटाक दूरी के मापक डग, बेतिया, फर्लागं कोस व मील पैदावार के बीघा, मानी, कठवा, गणना के गड़ा, बिसी व सैकड़ा व खाद्यान्न के पोली, पाई, कुरईया व पसेरी से जैसे मापक इतिहास की बातें बनते जा रहे हैं।

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Saturday, March 14, 2009

मौसम के साथ साथ राजनैतिक माहौल भी शुरू हुआ गर्माना...

लोकसभा चुनावों के करीब आने के साथ साथ अखबारों मे राजनैतिक खबरों का दबदबा बढ़ता जा रहा है। राजनैतिक दलों द्वारा प्रत्याशियों के नामों की घोषणा किया जाना व जीत के लिए की जा रही उठा पटक की खबरें इन दिनों सुर्खियों में हैं। भाजपा द्वारा मप्र के आठ सीटों मे लिए प्रत्याशियों के नामों की घोषणा को करीब करीब सभी अखबारों ने फ्रंट पेज पर छापा है। सागर सभा की तीन लोकसभा सीटों सागर , दमोह व टीकमगढ़ पर पार्टी ने क्रमश: भूपेन्द्र सिंह ठाकुर, शिवराज सिंह लोधी व वीरेन्द्र खटीक को अपना उम्मीदवार बनाया है। इस खबर को दैनिक भास्कर ने 'हारे हुए फिर दांव पर' व नवदुनिया ने ' क्या सागर देगा संभाग को तीन सांसद' बड़े रोचक अंदाज मे लगाया है। दैनिक जागरण ने अपनी पहली खबर मे शिक्षकों को सूचना के अधिकार का ज्ञान नहीं होने का मामला उठाया है। अखबार ने ' प्रधान अध्यापिका को सूचना के अधिकार का ज्ञान नहीं' शीर्षक से लगाई खबर मे लिखा है कि आवेदक को जानकारी देने की जगह शिक्षिका ने अपने वरिष्ठ अधिकारी संकूल प्राचार्य को इस टीप के साथ जानकारी भेजी की वह आवेदक की अधीनस्थ कर्मचारी नहीं है इसलिए वह उसे मांगी हुई जानकारी नहीं देगी। वहीं राजएक्सप्रेस ने शहर के मोतीनगर थाना क्षेत्र मे हुई गोलीबारी व गढ़ाकोटा क्षेत्र मे खेत मे बछड़ा घुसने के मामले पर दो पक्षों के बीच खूनी झड़प होने की खबरों को 'दो घटनाओं मे 14 घायल शीर्षक से लगाया। नवदुनिया ने 'वैकल्पिक रोशनी की तलाश' शीर्षक से लगाई खबर मे बुंदेलखण्ड क्षेत्र के लोगों को बिजली की कटौती से मुक्ति मे पवन उर्जा के सहायक सिद्ध होने की संभावनओं पर एक रपट लगाई है। पत्रकार अशीष शुक्ला ने सागर विश्वविद्यालय के भूगर्भशास्त्री प्रो० अरूण शाडिल्य के हवाले से लिखा है इस क्षेत्र मे कुछ कंपनियों ने रूचि भी दिखाई है। वे अगले माह सर्वेक्षण के लिए सागर आने की संभावना बताई है।Read More......

Friday, March 13, 2009

बुंदेलखण्ड मे पानी की कमी के बावजूद जमकर खिली होली...

होली रंग मे लोगों के तन मन रंगने के बाद आज अखबारों के मुख्य पृष्ठ होली के रंगों की खबरों से रंगें है। इस दौरान जिले भर मे हुई कुछ हिंसा व दुर्घटनाओं की खबरें भी प्रमुखता से प्रकाशित की गईं है। राजनीतिक सर्गरर्मियों की खबरें तो फिलहाल सुर्खियों मे हैं हीं।
होली से जुड़ी खबर राजएक्सप्रेस ने 'होली के हुड़दंग मे मस्त रहे हुरियारे' नवदुनिया ने 'रंगों की तरंग चेहरे हुए सतरंग' व दैनिक भास्कर ने ' होली के हुड्दंग मे 77 घायल' शीर्षक से मुख्य पृष्ठ पर छापा।

दैनिक जागरण ने लोकसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा के बाद से पल-पल बदलते जिले के राजनैतिक हालातों पर ' सपा ने बिगाड़े राजनैतिक समीकरण' शीर्षक से बाटॅम खबर लगाई है। वरिष्ठ पत्रकार नरेन्द्र सिलाकारी ने सपा द्वारा गौरी सिंह यादव को उम्मीदवार बनाए जाने के लिए कांग्रेस व भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा करने वाला बताया है। रपट मे लिखा है कि सागर लोकसभा सीट मे शामिल नई तीन विधानसभाओं शमशाबाद, कुरवई व सिरोंज मे भी दखल रखने वाले उम्मीदवारों को टिकिट दावेदारी अन्य उम्मीदवारों की तुलना मे भारी पड़ सकती है।
दैनिक भास्कर ने सागर विश्वविद्यालय के 30 एकड़ क्षेत्र मे फैले जंगलों मे आग लगने की खबर को काफी अहमियत से छापा है। खबर मे लिखा है कि कमोबेश हर साल लगने वाली इस आग से निपटने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा अब तक कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। रपट में जंगल की आग से क्षेत्र के वानस्पतिक संतुलन के गड़बड़ाने का भी अंदेशा जतायाहै।नवदुनिया ने सागर जिले मे गहराते पानी के संकट को ही आज की अपनी पहली खबर बनाया है।

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Monday, February 9, 2009

स्कूलों की मान्यता प्रमाण जारी नहीं होने से छात्रों का भविष्य अधर में...

रविवार को शहर के व्यस्ततम मार्ग पर स्थित गैराज मे आग लगने के बाद हुए धमाके की गूंज आज सभी अखबारों की सुर्खियों सुनाई पड़ रही है। साथ बुंदेलखण्ड में डकैतों के फिर से दिखाई पड़ने व स्कूलों के मान्यता के मामले मे छात्रों के भविष्य के अधर मे लटके होने के समाचार भी सुर्खियों मे छाए हुए है।
शहर के पीली कोठी के सामने स्थित दुबे ट्रस्ट की जमीन पर स्थित गैराज मे आग लगने से उसमें रखे वेल्डिंग सिलेण्डर के फटने से हुए धमाके से सारा सिविल लाईन क्षेत्र दहल गया। सभी अखबारों ने इस हादसे को पहली सुर्खी बनाया है। अखबारों ने लिखा है कि यह शहर का व्यस्ततम सड़क है। जिला कलेक्‍टोरेट, जिला न्यायालय, विश्वविद्यालय, स्कूल, मंदिर, मस्जिद से घिरा होने की वजह से इस क्षेत्र मे दिन भर भीड़ बनी रहती है। लेकिन रविवार का दिन होने की वजह से बड़ा हादसा होने से टल गया।
नवभारत ने दमोह जिले के मडियादो व किशनगढ़ से लगे जंगलों मे डकैतों के फिर दिखाई देने की सूचना को अपनी पहली लीड खबर बनाया है। 'हटा के जंगल मे फिर दिखे डकैत ' शीर्षक से लगी खबर मे लिखा है कि जिस गांव बृजपानी मे डकैतों के दिखने की खबर आई है वह गांव 1982-83 मे डकैतों द्वारा पहले ही उजाड़ किया जा चुका है। उसके बाद वह गांव दोबारा बस नहीं पाया। खबर मे बांदा के डकैत कुंवर सिंह पटैल के इस क्षेत्र मे सक्रिय होने का अंदेशा जताया है।
राज एक्सप्रेस ने छतरपुर जिले के चार सौ से ज्यादा स्कूलों के मान्यता संबंधी प्रमाण पत्र माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा सत्र की समाप्त होने समय तक जारी नहीं किए जाने की लापरवाही को उजागर किया है। खबर मे लिखा है कि अगर समय रहते प्रमाण पत्र जारी नहीं हुए तो ऐसी स्कूलों के विद्यार्थीं बोर्ड की परीक्षाओं मे बैठने के पात्र नहीं रह जाएगें। इस वजह से छात्र व अभिभावक चिंतित है।
दैनिक आचरण ने सागर से पेशी कराने जबलपुर हाईकोर्ट ले जाए गए कैदियों के भाग जाने पर जिम्मेदार 5 पुलिस कर्मी को विभाग द्वारा निलंबित किए जाने की खबर को अहमियत से छापा है।
नवदुनिया ने जिले के शासकीय माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के कायाकल्प करने की कवायद को अपनी बॉटम खबर बनाया है। 'नए रूप में दिखेंगें हाई व हायर सेकेण्डरी स्कूल' शीर्षक से लगाई खबर मे बताया गया है कि केन्द्रीय सरकार द्वारा सरकारी माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों मे सुधार लाने के लिए राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान की शुरूआत की है। जिसके पूरे हो जाने के बाद स्कूलों के सर्वसुविधा संपन्न हो जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
दैनिक भास्कर ने महाराष्ट्र एवं गुजरात की तर्ज पर बुंदेलखण्ड के खेतों मे तालाब बनाए जाने की खबर लगाई है। खबर मे लिखा है कि तालाबों के पानी का रिसाव रोकने के लिए तालाबों की सतहों पर आयतित धातु की परत चढ़ाई जाएगी।
अन्य खास खबरों में जिले के गढ़ाकोटा के तहसील मे आयोजित लोक कल्याण शिविर मे गैर हाजिर रहने पर जिला कलेक्टर हीरालाल त्रिवेदी ने 19 पंचायत सचिवों को निलंबन के नोटिस जारी किए हैं जबकि सात को निलंबित कर देने की खबर को सभी अखबारों ने प्रमुखता से छापा है।

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Sunday, February 8, 2009

सागर को प्लास्टिक कचरा मुक्त बनाने की पहल शुरू....

केन्द्रीय विवि का दर्जा मिलने के साथ ही सागर के विवि मे बदलाव का दौर काफी तेज होता जा रहा है। साथ ही लोगों की जागरूकता की वजह से दलितों पर होने वाले अत्याचार भी बड़ी तादाद मे रोशनी मे आने लगें हैं। कमोबेश सभी अखबारों की सुर्खियों मे यही मुद्दे छाए हुए हैं।
राजएक्सप्रेस ने सागर विवि को केन्द्रीय विवि का दर्जा मिलने के बाद यहां हो रहे बदलावों को ही अपनी पहली खबर बनाया है। खबर मे लिखा है कि राज्य शासन द्वारा हाल ही में प्रदेश भर मे परीक्षा प्रणाली मे बदलाव किए जाने से विवि में परीक्षा की वार्षिक प्रणाली के साथ साथ सेमिस्टर प्रणाली भी शुरू हो गई थी। लेकिन केन्द्रीय विवि बनते ही विवि मे आनर्स प्रणाली लागू करने की भी कवायद शुरू हो गई हे। इससे यह प्रदेश का एकमात्र ऐसा विवि बनगया है जहां परीक्षा की तीन प्रणाली एक साथ प्रभाव मे है और विवि को तीन तरह के पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कराने पड़ रही है।
दैनिक जागरण ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी योजना पर अपनी पहली खबर लगाई है। अखबार ने लिखा है नौ महीने मे सागर संभाग में कुल मंजूर हुए कामों मे से महज 17 फीसदी काम ही पूरे हो पाए हैं। संभाग भर में इस अवधि मे 6 अरब रूपए से अधिक के 46371 काम मंजूर हुए लेकिन राशि केवल 3 अरब 97 करोड़ 93 लाख रूपए की मंजूर हुई। इसमें से सवा चार लाख रूपए के करीब 30 हजार काम ही शुरू हो पाए हैं।
नवभारत ने मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सागर कार्यालय की पहल पर शहर के प्लास्टिक कचरे को ईंधन के रूप मे उपयोग करने के लिए नरसिंहपुर में स्थित एक सीमेण्ट फैक्टरी मे भेजे जाने का सिलसिला शुरू होने को अपनी पहली खबर बनाया है। 'प्लास्टिक कचरे से मुक्त होगा शहर' शीर्षक से लगाई खबर मे अखबार ने लिखा है कि यह पहल शहर को साफ-सुथरा रखने की दिशा मे अहम भूमिका निभाएगी। नवदुनिया ने भी इसी खबर को ' नरसिंहपुर मे जलेगा सागर का प्लास्टिक' शीर्षक से इस खबर को पहली सुर्खी बनाया है।
दैनिक आचारण ने सागर लोकसभा क्षेत्र मे आगामी चुनावों को लेकर राजनैतिक दलों मे शुरू हुई सुगबुहाट पर एक खास रपट लगाई है।
दैनिक भास्कर ने भाजपा के प्रदेश महामंत्री भूपेन्द्र सिंह ठाकुर के बड़े भाई के साथ बीती रात सेना के तीन जवानों द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने के विरोध मे मकरोनिया मे आक्रोशित जनता द्वारा चक्का जाम किए जाने की खबर को फ्रंट पेज पर छापा है।
अन्य खास खबरों मे दैनिक जागरण ने स्व० राजमाता सिंधिया के जन्म स्थल सागर स्थित राणा पैलेस मे आज भी ऐतिहासिक महत्व की अनेक वस्तुओं के सुरक्षित रखे होने पर लीक से हटकर खबर लगाई है। खबर मे लिखा है कि 10 अक्टूबर 1919 को सागर के कौशल कुंज मे जन्मी लेखा दिव्येश्वरी ही सिंधियां घराने मे शादी होने के बाद राजमाता विजयराजे सिंधिया के रूप मे मशहूर हुईं।
वहीं दैनिक भास्कर ने सागर विवि को केन्द्रीय विवि का दर्जा मिलने के बाद केन्द्र से 10 करोड़ का और अनुदान मिलने, बकाया बिल की वजह से शहर की जलापूर्ति करने वाली राजघाट जलावर्धन परियोजना की बिजली कटने के अंदेशा व नवदुनिया ने मानव संसाधन मंत्रालय की जेनिसिस योजना के तहत चुने गए मप्र के 42 छात्रों मे शामिल सागर के 4 छात्रों को भी जापान जाने का मौका मिलने व राजएक्सप्रेस ने दमोह के हटा विधानसभा क्षेत्र के नोनपानी गांव मे सरपंच को दबंगों द्वारा कुर्सी पर नहीं बैठने देने, खुरई की खोजाखेड़ी ग्राम पंचायत मे शराब पनी पैसा नहीं देने पर सरपंच की दबंगों द्वारा पिटाई किए जाने की खबर को अहमियत से छापा है।

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